Hindi Diwas

‘हिन्दी हूँ मैं वतन भी मेरा प्यारा हिन्दुस्तान है।‘इससे पुख्ता पहचान हम शरतीयों के व्यक्तित्व की और हो भी क्या सकती है। पर क्या हिन्दी दिवस का मुख्य उद्देष्य वर्ष में सिर्फ एक दिन इस बात से लोगों को रूबरू करवाना है कि हम हिन्द के वासी हैं और हमें अपनी राष्ट्रभाषा का सम्मान करना चाहिए। क्या यह हमारा मौलिक कर्त्तव्य नहीं बनता कि हम अपनी शवी पीढ़ी को अपनी मातृभाषा की गरीमा का महत्त्व बताएँ। आधुनिकता की दौड़ में अपनी वास्तविकता से जुड़े रहने का मार्ग समझाएँ। डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद जी द्वारा कहे गए ये वचन कि ‘जिस देश को अपनी भाषा व साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं, वह देश का उन्नत नहीं हो सकता।‘ हमें यह सोचने पर बाध्य कर देते हैं कि क्या हम जीवन में सही मार्ग पर अग्रसर हैं? हिन्दी केवल एक भाषा ही नहीं अपितु भारतीयों को एक दूसरे के समीप लाने का माध्यम है। राष्ट्र की उन्नति के लिए हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार आवश्यक है।

अपनी आत्मा को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने का एक उत्कृष्ट प्रयत्न आज हमारे विद्यालय के प्रांगण में किया गया। वर्तमान समय में जहाँ हमारे देश में विदेशी भाषाओं का प्रचलन बढ़ता जा रहा है वहीं हिन्दी भाषा की प्रज्ज्वलित मशाल लिए हमारे विद्यालय ‘दिल्ली पब्लिक स्कूल, पुणे ने हिन्दी दिवस की 69 वीं वर्षगाँठ को बड़े ही रचनात्मक ढंग से मनाया। हिन्दी भाषा व साहित्य से संबंधित अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दिन विषेष तौर पर सभी को विद्यालय में सिर्फ शुद्ध हिन्दी बोलने के लिए प्रेरित किया गया।

‘हिन्दी दिवस‘ के उपलक्ष में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती नीलम चक्रवर्ती ने अपने कर कमलों से ‘कोंपल‘ पत्रिका का विमोचन करके किया। जिन बच्चों की कृतियाँ कोंपल पत्रिका में प्रकाशित र्हुइं, उन्हें सम्मानित किया गया। तत्पश्चात हिन्दी भाषा के उद्भव और विकास पर प्रकाश डाला गया।

तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों ने शानदार कवि सम्मेलन का आयोजन किया। नाट्य प्रस्तुति ने सभा में चार चाँद लगा दिए।

Added on: 14 Sep 2018

Published by: School Admin